ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?

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ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ? *नई नवेली दुल्हन जब* *ससुराल में आई* तो उसकी *सास बोली*  : बींदणी कल माता के मन्दिर में  चलना है। *बहू ने पूछा*: सासु माँ एक  तो ' माँ ' जिसने मुझे  जन्म  दिया और एक ' आप ' हो और कौन सी माँ है ? सास बडी खुश हुई कि मेरी  बहू तो बहुत सीधी है । *सास ने कहा* - बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे । सुबह दोनों एक साथ मन्दिर जाती है । आगे सास पीछे बहू । जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा : माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है , मैं बाल्टी लाती हूँ ,और दूध निकालते है । सास ने अपने सिर पर हाथ पीटा कि बहू तो  *पागल* है और बोली :-  बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नही दे सकती। चलो आगे । मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी । फिर बहू ने कहा - माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा। सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया ।  और  बोली - बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ? चलो अंदर चलो मन्दिर में, और *सास बोली* - बेटा ये माता है,...

Santaan prapti ke liye...

निसंतान होना प्रत्येक दंपत्ति और उसके परिवार के लिए बहुत कष्टकारी होता है। संतान प्राप्ति के  दंपत्ति हर तरीके से लिएप्रयत्न करते हैं। वर्तमान समय में बच्चे ना होना एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। यह समस्या उन घरों में अधिक है जिन की जीवन शैली तनावपूर्ण एवं अनियमित हो गई है। निसंतान व्यक्ति हर तरीके का उपचार कराने के लिए अनेकानेक डॉक्टरों के पास जाता है। अभी उपचार सफल रहता है और कभी कई प्रयत्न करने के बावजूद उपचार सफल नहीं हो पाता। आज जो उपाय मैं आपको बताने जा रहा हूं वह उपाय अपने वर्तमान उपचार के साथ साथ करिए। आस्थावान लोगों के लिए यह उपाय दवाओं में चमत्कारिक प्रभाव उत्पन्न कर देगा। यह है संतान गणपति स्तोत्र का पाठ। पूजा के समय इसका श्रद्धा पूर्वक नित्य पाठ आपकी मनोकामना अवश्य पूरी करता है।

संतानगणपतिस्तोत्र
नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धिबुद्धियुताय च ।सर्वप्रदाय देवाय पुत्रवृद्धिप्रदाय च॥ गुरूदराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते। गोप्याय गोपिताशेषभुवनाय चिदात्मने। विश्वमूलाय भव्याय विश्वसृष्टिकराय ते । नमो नमस्ते सत्याय सत्यपूर्णाय शुण्डिने ॥ एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः । प्रपन्नजनपालाय प्रणतार्तिविनाशिने ॥ शरणं भव देवेश संततिं सुदृढां कुरु । भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक ॥ ते सर्वे तव पूजार्थं निरताः स्युर्वरो मतः । पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम् ॥

जिन्हें संस्कृत में पढ़ने में कठिनाई हो वह इसका हिंदी में भी बात कर सकते हैं। हिंदी पाठ इस प्रकार है-
सिद्धि - बुद्धिसहित उन गणनाथको नमस्कार है , जो पुत्रवृद्धि प्रदान करनेवाले तथा सब कुछ देनेवाले देवता हैं । जो भारी पेटवाले ( लम्बोदर ) , गुरु ( ज्ञानदाता ) , गोप्ता ( रक्षक ) , गुह्य ( गूढस्वरूप ) तथा सब ओरसे गौर हैं । जिनका स्वरूप और तत्त्व गोपनीय है तथा जो समस्त भुवनोंके रक्षक हैं , उन चिदात्मा आप गणपतिको नमस्कार है । जो विश्वके मूल कारण , कल्याणस्वरूप , संसारकी सृष्टि करनेवाले , सत्यरूप , सत्यपूर्ण तथा शुण्डधारी हैं , उन आप गणेश्वरको बारम्बार नमस्कार है । जिनके एक दाँत और सुन्दर मुख है जो शरणागत भक्तजनोंके रक्षक तथा प्रणतजनोंकी पीड़ाका नाश करनेवाले हैं , उन शुद्धस्वरूप आप गणपतिको बारम्बार नमस्कार है । देवेश्वर ! आप मेरे लिये शरणदाता हो । मेरी संतान  परम्पराको सुदृढ करें । गणनायक ! मेरे कुलमें जो पुत्र हों , वे सब आपकी पूजाके लिये सदा तत्पर हों - यह वर प्राप्त करना मुझे इष्ट है । यह पुत्र प्रदायक स्तोत्र समस्त सिद्धियों को देनेवाला है ।

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